मुग़ल साम्राज्य का चौथा बादसाह इस्लाम शाह सूरी – 1545-1554
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इस्लाम शाह सूरी ने अपने पिता शेर शाह सूरी के साम्राज्य को आगे बढाया। जिसे उसने 1545 से लेकर 1554 तक चलाया। लेकिन बादमें मुग़ल शासक हुमायूँ ने वापिस जीत लिया।
किसी भी व्यवसाय में वर्तमान में जो मॉल हमारे पास उपलब्ध है रहतिया कहलाता है अतः वर्ष के अंत में जो मॉल रह जाता है रोहतिया स्टॉक कहलाता है तथा अगले वर्ष के पहले दिन वही मॉल ओपनिंग स्टॉक कहलाता है
शेर शाह सूरी का प्रारंभिक इतिहास – Sher Shah Suri In Hindi शेर शाह सूरी का जन्म फरीद खान के नाम से भारत के बिहार प्रान्त के सासाराम ग्राम में हुआ था. उनका उपनाम सूरी उनके प्राचीन ग्राम सुर से लिया गया था. जब वे युवावस्था में थे तभी उन्होंने एक शेर का शिकार किया था और तबसे उनका नाम शेरशाह रखा गया. उनके दादा इब्राहीम खान सूरी नारनौल के प्रसिद्ध जागीरदार थे और कुछ समय के लिए उन्होंने दिल्ली के शासक का भी प्रतिनिधित्व भी किया था. आज भी नारनौल में इब्राहीम खान सूरी का स्मारक बना हुआ है. तारीख-खान जहाँ लोदी ने भी इस बात को स्पष्ट किया था. शेरशाह पश्तून सुर समुदाय से संबंध रखते थे (इतिहास में पश्तून अफगानी के नाम से भी जाने जाते थे). उनके दादा इब्राहीम खान सूरी एक साहसी योद्धा थे अपने बेटे हसन खान के साथ शेर शाह के पिता अफगानिस्तान से हिंदुस्तान वापिस आये, वे जिस जगह पर आये थे उस जगह को अफगान भाषा में “शर्गरी” और मुल्तान भाषा में “रोहरी” कहते थे. वे जहा रहते थे वहा एक ऊँची पर्वतश्रेणी थी, जो गुमल के किनारे पर स्थित था. बाद में उन्होंने मुहब्बत खान सुर, दौड़ साहू-खैल की सेवा की जिन्होंने श...
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